अमरनाथ यात्रा तिथि पर असमंजshriinagar [जागरण ब्यूरो]। श्री अमरनाथ यात्रा 15 जून से शुरू किए जाने को लेकर राज्यपाल एनएन वोहरा ने गुरुवार को पवित्र गुफा स्थल और उससे सटे इलाकों का हवाई सर्वे किया। लेकिन यात्रा के बारे में अभी भी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने शुक्रवार को स्थिति स्पष्ट किए जाने का संकेत दिया है। जानकारी के मुताबिक सब कुछ ठीक रहने पर ही बालटाल से यात्रा को 15 जून से शुरू किया जाएगा। अन्यथा 17 जून से हैलीकाप्टर के जरिए श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन की अनुमति दी जा सकती है। पहलगाम के रास्ते यात्रा 23 जून को शुरू की जा सकती है।
उधर अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर यात्रा फिर से टाली गई तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। संघर्ष समिति के संयोजक सुचेत सिंह ने कहा है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ सहन नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यात्रा किसी भी सूरत में दोबारा स्थगित नहीं होनी चाहिए।
शिवभक्तों के लिए लंगर शुरू
जम्मू। श्री अमरनाथ यात्रा शुरू होने के बाबत भले अभी असमंजस बना हुआ है, लेकिन शिवभक्तों के लिए गुरुवार से लंगर शुरू हो गया है। दिल्ली की एक संस्था ने भगवती नगर स्थित चंद्रभागा सामुदायिक हाल में इसकी शुरूआत की है।
शिवानी रंग अमरनाथ सेवा संघ की ओर से शुरू किए गए लंगर में साधुओं को तीनों समय भोजन परोसा जा रहा है। भगवती नगर स्थित यात्री निवास में अभी सुविधाओं का टोटा होने के कारण साधुओं की कई टोलियां चंद्रभागा सामुदायिक हाल में ठहरी हुई है। उधर यात्रा आधार शिविर में लंगर व्यवस्था को लेकर अभी असमंजस बना हुआ है। लंगर लगाने वाली संस्थाओं को पहले पंद्रह जून से लंगर आरंभ करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अब 24 जून से कहा जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस संदर्भ में शुक्रवार को जम्मू के डिवीजनल कमिश्नर यात्री निवास में एक बैठक कर व्यवस्था का जायजा भी लेने वाले हैं। यात्री निवास के निकट तीन संस्थाओं को लंगर लगाने की अनुमति मिली है, जिनमें एक दिल्ली की, एक पंजाब की व एक जम्मू की हिंदू शिवसेना शामिल हैं।
कच्चा तेल 73 डालर के करीब
न्यूयार्क। ग्लोबल अर्थव्यवस्था में सुधार को देखते हुए कच्चे तेल [क्रूड] ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मांग बढ़ने की उम्मीद में गुरुवार को इसके दाम भड़ककर 73 डालर प्रति बैरल के करीब पहुंच गए। क्रूड में लगातार तीन दिनों से तेजी जारी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने बीते साल अगस्त के बाद पहली बार विश्व की क्रूड मांग में बढ़ोतरी का अनुमान जाहिर किया है।
जुलाई डिलीवरी वाला यूएस क्रूड 1.50 डालर की तेजी के साथ 72.83 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह 21 अक्टूबर, 08 के बाद इस स्तर पर पहुंचा है। लंदन ब्रेंट क्रूड के दाम भी 1.07 डालर चढ़कर 71.87 डालर प्रति बैरल हो गया।
गौरतलब है कि बीते साल जुलाई में सरपट भागते हुए कच्चा तेल 147.27 डालर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था। बाद में मंदी के असर में यह लुढ़कते हुए इस साल फरवरी में 32 डालर के निचले स्तर तक जा चुका है।
भारत के तेवर देख पीछे हटा अमेरिक

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। इसे भारतीय कूटनीतिक दबाव का नतीजा ही कहा जा सकता है कि पाकिस्तान पर दो तरह की बात कर रहे अमेरिका ने गुरुवार को भारत-पाक वार्ता के मामले से खुद को दूर कर लिया। बुधवार तक इस्लामाबाद से बातचीत के लिए नई दिल्ली पर दबाव बढ़ा रहे अमेरिकी उप मंत्री विलियम जे. बर्न्स को चौबीस घंटों बाद ही यह कहने पर मजबूर होना पड़ा कि 'वार्ता कैसे हो और कब हो यह दोनों मुल्कों को ही तय करना है। अमेरिका दोनों के बीच बातचीत का हमेशा स्वागत करता है।' प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लंबी मुलाकात के बाद बर्न्स ने अपने तेवर ऐसे बदले कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि मुंबई हमलों के गुनाहगारों को सजा दिलाने का पूरा दायित्व पाकिस्तान पर ही है और अमेरिका की कोशिश लगातार जारी रहेगी कि वह ऐसा कर दिखाए।
यानी अमेरिका अब यह संकेत दे रहा है कि उसे पाक से वार्ता के लिए भारत की शर्त पर कोई एतराज भी नहीं रहा। लेकिन बर्न्स यह संदेश देने की कोशिश लगातार करते रहे कि तनाव घटाने के लिए भारत और पाक को वार्ता मेज पर दोबारा पहुंचना चाहिए। गौरतलब है कि भारत ने वार्ता से पहले पाक से 26/11 के हमलावरों को दंडित किए जाने की शर्त रखी है। ऐसा नहीं है कि बर्न्स ने यह शर्त हटवाने की कोशिश नहीं की। बुधवार को दिन भर की मेल मुलाकातों से लेकर आज प्रधानमंत्री से बातचीत तक राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रतिनिधि बर्न्स ने भारत पर पाक से वार्ता के लिए दबाव बनाया, वह भी बिना शर्त। लेकिन मनमोहन ने उन्हें दो टूक बता दिया कि अमेरिका की इस कोशिश पर भारत में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है। उन्होंने अमेरिकी अधिकारी को यह भी बता दिया कि इस मामले में देश की संसद में जो रुख लिया गया है उसमें बदलाव का प्रश्न ही पैदा नहीं होता।
सूत्रों के मुताबिक बर्न्स पर इसका खासा असर हुआ और उन्होंने अमेरिका में अपने आकाओं से फोन पर बातचीत कर भारत-पाक वार्ता पर अपना नजरिया बदल लिया। लिहाजा विदेश मंत्री एस एम कृष्णा से मिलकर अपने तेवरों से भारतीय कूटनीतिक खेमे को हैरत में डालने वाले बर्न्स ने आज वही कहा जो साउथ ब्लाक के रणनीतिकार सुनना चाहते थे। ओबामा का एक खत भी बर्न्स ने मनमोहन को सौंपा। ओबामा का खत भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा रणनीतिक रिश्तों को और ऊंचाई पर ले जाने का संदेश है। बर्न्स ने नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की।
पेंटागन की उस रिपोर्ट से भी अमेरिका पर दबाव बढ़ा जिसमें पाकिस्तान द्वारा वाशिंगटन से मिले फंड का दुरुपयोग का खुलासा सामने आया। पाक को वित्तीय मदद रोकने पर बर्न्स ने गोलमोल जवाब ही दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब पाक को मिल रही आर्थिक मदद पर निगरानी रखेगा ताकि ऐसे किसी दुरुपयोग की गुंजाइश न बचे। उन्होंने कहा कि मुंबई हमलों जैसी घटना दोबारा न हो इसका दायित्व पाक पर प्रमुखता से है। लेकिन ठीक यहीं बर्न्स मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की रिहाई को भी टाल गए। उन्होंने केवल इतना कहा कि किसी भी आतंकी संगठन को खत्म करने के लिए पाक को अमेरिका कहता रहेगा।

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