
मास्को। ढेरों उम्मीद लिए सोमवार को मास्को पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की कई मुंह मांगी मुरादें एक ही दिन में पूरी हो गईं। परमाणु हथियारों की कटौती पर ओबामा रूस के साथ 1991 की स्टार्ट संधि की जगह जो नया समझौता करना चाहते थे, उस पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर कर दिए। अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी व नाटो सैनिकों को साजो-सामान पहुंचाने के लिए वह रूसी वायु क्षेत्र के इस्तेमाल की इजाजत चाहते थे। इस पर भी समझौता हो गया और मुफ्त में वायु सीमा के इस्तेमाल की इजाजत मिल गई। अब अमेरिकी विमान साल में साढ़े चार हजार बार रूसी वायु सीमा से उड़ान भर सकते हैं।
इतना ही नहीं रूस, अफगानिस्तान में जारी जंग में अमेरिका का साझीदार बनने के लिए भी सहमत हो गया। हालांकि इन सब के लिए ओबामा को मध्य यूरोप में मिसाइल रक्षा प्रणाली की तैनाती की अमेरिकी योजना पर रूसी दबाब के आगे थोड़ा झुकना पड़ा। ओबामा ने इस बारे में समझौते के संकेत दिए हैं।
सोमवार शाम ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव मिले। फिर भारतीय समयानुसार शाम साढ़े सात बजे जब दोनों नेता संयुक्त संवाददाता सम्मेलन संबोधित करने आए, संशय के सारे बादल छंट गए। ओबामा ने परमाणु हथियारों में कटौती के नए समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने की घोषणा की। यह समझौता 31 जुलाई 1991 को हस्ताक्षरित शीत युद्धकालीन स्टार्ट संधि का स्थान लेगा, जिसकी मियाद 5 दिसंबर को समाप्त होने जा रही है। नए करार के अनुसार, दोनों देश अपने परमाणु हथियारों की तादाद घटा कर डेढ़-डेढ़ हजार करेंगे। इसके साथ ही दोनों देश इन हथियारों को लक्ष्य तक पहुंचाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों की अधिकतम स्वीकृत संख्या में 500 से 1100 के बीच कटौती के लिए भी तैयार हो गए हैं। यह करार इस वर्ष के अंत तक कानूनी रूप ले लेगा।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए ओबामा ने कहा कि हम रूस-अमेरिका रिश्ते को पटरी पर लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका कहना था कि दोनों देशों ने परमाणु हथियारों का प्रसार रोकने और नाभिकीय सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाया है। ओबामा और मेदवेदेव ने दुनिया के सभी देशों से मिसाइलों के प्रसार को रोकने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया। मेदवेदेव ने अफगानिस्तान युद्ध में प्रभावी भूमिका निभाने की घोषणा की। दोनों देशों ने अफगानिस्तान को लेकर समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही अमेरिका और रूस ने सैन्य स्तर पर आपसी सहयोग बढ़ाने की घोषणा। द्विपक्षीय रिश्तों को नया आयाम देने के लिए दोनों देशों ने एक आयोग बनाने पर सहमति जताई।
क्या है स्टार्ट संधि
तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने 29 जून 1982 को सामरिक हथियार कटौती संधि [स्टार्ट] के लिए रूस के समक्ष प्रस्ताव रखा था। लेकिन, इन प्रस्तावों पर तत्कालीन सोवियत संघ ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। सोवियत संघ के पतन के पांच महीने पूर्व 31 जुलाई 1991 को स्टार्ट संधि पर दोनों देशों ने दस्तखत किए। इस संधि के तहत अमेरिका के पास जहां 3696 तैनात परमाणु हथियार हैं वहीं रूस के पास इस तरह के 4237 हथियार हैं।

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